सबसे कठिन खुद को परिभाषित कर पाना है।अज्ञेय बने रहना अच्छा है।
मैं एक व्यवसायी हूं,दो तरह के डी टी एच सेटेलाइट रिसीवरों (dishtv & beetel) का वितरक हूं। अब विपणन पर ही फ़ोकस है।
अब पढना और कभी कभी लिख्नना अच्छा लगता है।
इसी और दुसरे कारणों से (कतिपय सामाजिक)अब एक मासिक अखबार शुरु कर रहा हुं।इसका टाइट्ल है "कैरियर ट्रेक"। यह रजिस्टर्ड भी है। ब्लोग पाठकों का सहयोग मिल जाए तो कहना ही क्या !